अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में दिवाली से पहले एक 35 वर्षीय युवक की मौत के बाद उसके अंगों के दान से तीन लोगों की जिंदगी बचाई गई। यह घटना गांधीनगर जिले के देहगाम की है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल युवक को ब्रेन डेड घोषित किया गया।
दुर्घटना और अस्पताल में उपचार
31 अक्टूबर को देहगाम के पास सड़क दुर्घटना में युवक के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे पहले गांधीनगर और फिर अहमदाबाद सिविल अस्पताल में लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन चोटों की गंभीरता के कारण 3 नवंबर को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
पत्नी का साहसिक निर्णय
इस दुखद घड़ी में, सिविल अस्पताल की काउंसलिंग टीम और डॉक्टरों ने युवक की पत्नी को ब्रेन डेथ और अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। पति को खोने के असहनीय दर्द के बीच पत्नी ने अद्भुत साहस दिखाते हुए अंगदान के लिए सहमति दी।
उनके इस फैसले से 1 लिवर और 2 किडनी निकाली गईं, जिन्हें तुरंत सिविल मेडिसिटी कैंपस के किडनी अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल की उपलब्धि
इस घटना के साथ ही अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने 260वें अंगदान का मील का पत्थर छू लिया। अब तक अस्पताल के माध्यम से 1,126 अंगों और टिश्यू का दान हो चुका है।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि अंगदान निस्वार्थता का सबसे बड़ा रूप है, जो इंसान को मौत के बाद भी जिंदा रखता है। उन्होंने इस फैसले के लिए परिवार के साहस और मानवता की सराहना की।
Source: NDTV India
