दिवाली के अवसर पर आयोजित होने वाली विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार के लिए एक शुभ शुरुआत मानी जाती है। निवेशकों के लिए यह समय नए संवत की शुरुआत के साथ निवेश करने का एक महत्वपूर्ण मौका होता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इस दिन बाजार हमेशा सकारात्मक रहे।
पिछले दशक की समीक्षा
पिछले दस वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान भारतीय शेयर बाजार ने 10 में से 8 बार सकारात्मक प्रदर्शन किया है। 2016 से 2025 तक के इस कालखंड में सेंसेक्स और निफ्टी ने अधिकांश अवसरों पर वृद्धि के साथ समापन किया।
सिर्फ 2016 और 2017 के साल ऐसे थे जब मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान बाजार नकारात्मक रहा। 2016 में निफ्टी 0.14% और सेंसेक्स 0.04% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि 2017 में निफ्टी 0.63% और सेंसेक्स 0.59% की गिरावट के साथ समाप्त हुआ।
वृद्धि के वर्ष
2018 से 2025 तक का समय बाजार के लिए लाभकारी रहा। 2018 में निफ्टी 0.65% और सेंसेक्स 0.70% की वृद्धि के साथ बंद हुआ। 2019 में भी दोनों इंडेक्स ने क्रमशः 0.37% और 0.49% की वृद्धि दर्ज की।
2022 का मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन सर्वाधिक लाभकारी रहा, जब सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 0.87% की वृद्धि के साथ बंद हुए। इसके बाद 2023 में सेंसेक्स 0.54% और निफ्टी 0.51% की बढ़त के साथ समाप्त हुआ।
2025 में बाजार की स्थिति
पिछले साल, 2025 में, बाजार में सीमित गतिविधि देखी गई। सेंसेक्स 63 अंकों की वृद्धि के साथ 84,426.34 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,868.60 के स्तर पर पहुंचा। निफ्टी में 0.10% और सेंसेक्स में 0.07% की मामूली तेजी रही।
मुहूर्त ट्रेडिंग का महत्व
मुहूर्त ट्रेडिंग का प्रदर्शन पूरे वर्ष के बाजार रुझान की गारंटी नहीं देता। इस दिन का कारोबार समय सीमित होता है और वॉल्यूम भी सामान्य दिनों की तुलना में कम रहता है। इसलिए निवेशकों को केवल शुभ मुहूर्त देखकर शेयर खरीदने के बजाय कंपनी के मूलभूत सिद्धांतों, मूल्यांकन और निवेश क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
Source: NDTV India
