दीवाली के रंगारंग उत्सव में अक्सर हम खुशियों और रोशनी के गीत सुनते हैं, लेकिन एक गाना ऐसा भी है जो 67 वर्षों से आम आदमी के दर्द को बयां कर रहा है। यह गाना है ‘कैसे दिवाली मनाए लाला’, जो 1959 की फिल्म ‘पैगाम’ का हिस्सा था। इसे मोहम्मद रफी ने गाया था और जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया।
गाने की खासियत
गाने के बोल कवि प्रदीप ने लिखे थे और संगीत सी. रामचंद्र ने दिया था। इस गाने में आम आदमी के जीवन की आर्थिक तंगी और संघर्ष को लेकर व्यंग्यात्मक रूप से सवाल उठाए गए हैं। जॉनी वॉकर ने अपनी अदाकारी से इस गीत को और भी यादगार बना दिया।
गीत के बोल कुछ इस प्रकार हैं, “कैसे दिवाली मनाएं हम लाला, अपना तो बारह महीने दिवाला।” यह गाना समाज में आर्थिक असमानता को उजागर करता है और यह बताता है कि कैसे कुछ लोग त्यौहार की खुशियाँ मनाते हैं जबकि अन्य अपनी तंगी से जूझते रहते हैं।
फिल्म ‘पैगाम’ की पृष्ठभूमि
‘पैगाम’ एक सामाजिक ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन एस. एस. वासन ने किया। इस फिल्म में दिलीप कुमार, राज कुमार, वैजयंतीमाला, बी. सरोजा देवी और जॉनी वॉकर ने मुख्य भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म की कहानी मजदूरों और मिल मालिकों के बीच के संघर्ष पर आधारित थी। इसमें श्रमिकों के अधिकार और सामाजिक न्याय का संदेश दिया गया था।
जॉनी वॉकर का योगदान
हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन में से एक जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था। 1950 और 1960 के दशक में उन्होंने अपनी अनोखी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीता। ‘सीआईडी’, ‘प्यासा’, ‘मधुमती’, ‘नया दौर’ और ‘पैगाम’ जैसी फिल्मों में उनकी भूमिकाएँ आज भी याद की जाती हैं।
Source: NDTV India
