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भोजपुरी छठ गीत ‘हमहीं उठावतानी दउरा’ की मार्मिक कहानी

छठ पूजा के अवसर पर भोजपुरी संगीत में एक नया और दिल को छू लेने वाला गीत ‘हमहीं उठावतानी दउरा’ रिलीज़ हुआ है। यह गीत उन परिवारों की भावनाओं को उजागर करता है जिनके बच्चे नौकरी के कारण घर से दूर रहते हैं। गीत का प्रमुख विषय मां की ममता और परदेस में रहने वाले बेटे की मजबूरी है।

गीत की कहानी

यह मार्मिक गीत एक मां की कहानी कहता है जो छठ पर्व पर अपने बेटे का इंतजार करती है। बेटा नौकरी के कारण घर नहीं लौट पाता, और मां खुद छठी मइया का दउरा उठाकर घाट की ओर चल पड़ती है। इस दौरान एक अनजान युवक उसकी मदद करता है, जिससे कहानी में इंसानियत और प्यार के रिश्तों की अनोखी बानगी देखने को मिलती है।

गीत में एक मां की दुआओं और बेटे की सफलता की कहानी है, जो नौकरी के सिलसिले में घर से दूर रहता है। यह गीत उन सभी प्रवासी परिवारों के दर्द को सामने लाता है जो अपनों से दूर रहकर काम करते हैं।

गीत की विशेषताएँ

‘हमहीं उठावतानी दउरा’ गीत के बोल मनोज भावुक ने लिखे हैं, जबकि इसे अपूर्वा प्रियदर्शी और शैलेन्द्र मिश्रा ने गाया है। संगीत सुशांत देव का है और इसका निर्देशन उज्ज्वल पांडेय ने किया है। इस गीत को यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया है और इसे लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

वीडियो में राखी जायसवाल, शुभ तिवारी और हर्षित सिंह ने अभिनय किया है। गीत की कहानी और उसकी भावनात्मक अपील ने दर्शकों को प्रभावित किया है, और इसे बार-बार सुना जा रहा है।

प्रवासी जीवन की मजबूरी

यह गीत प्रवासी भारतीयों की भावनाओं को उजागर करता है, जो अपने परिवार से दूर रहकर नौकरी करते हैं। गीत का संदेश यह है कि जीवन में नौकरी और सफलता महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अपनों का प्यार और अपनापन सबसे बड़ी कमाई है।

इस तरह के गीत सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव को और मजबूत करते हैं, और यह गीत भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Source: NDTV India

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