फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के प्रमोटर किशोर बियानी और उनकी कंपनी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गंभीर कार्रवाई शुरू कर दी है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर ₹904.32 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में कंपनी के प्रमोटरों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
सीबीआई की छापेमारी
सीबीआई ने 4 नवंबर 2026 को एफआईआर दर्ज करने के बाद 6 नवंबर को मुंबई में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
शिकायत और आरोप
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 9 अक्टूबर 2026 को सीबीआई को शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और उसके प्रमोटरों ने बैंकों से लिए गए कर्ज का दुरुपयोग किया और बड़ी रकम को अन्य कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित कर दिया। इस धोखाधड़ी के कारण एसबीआई को ₹904.32 करोड़ का नुकसान हुआ है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि कंपनी के निदेशकों ने बैंक से मिली राशि को अन्य संबंधित कंपनियों में ट्रांसफर किया, जिनकी वित्तीय क्षमता इतनी बड़ी रकम के लेन-देन के लिए उपयुक्त नहीं थी।
फॉरेंसिक ऑडिट और वित्तीय अनियमितताएं
बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा 15 सितंबर 2023 को किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में कंपनी के लेखांकन रिकॉर्ड में अनियमितताओं का खुलासा हुआ। यह ऑडिट 1 अप्रैल 2017 से 30 अप्रैल 2022 तक की अवधि के लिए किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनी के खातों में हेराफेरी की गई और वित्तीय लेन-देन को कई स्तरों पर घुमाया गया।
फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर 23 मार्च 2025 को कंपनी के खाते को धोखाधड़ी घोषित किया गया। सीबीआई अब इस मामले में आपराधिक जांच कर रही है और सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।
Source: NDTV India
