उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर कार्यरत रहीं पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज सिंह ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। उनके इस निर्णय के बाद, 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में उनकी भागीदारी की अटकलें लगाई जा रही हैं।
वीडियो संदेश के जरिए दी जानकारी
अनुपमा सरोज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वे प्रशासनिक सेवा से आगे बढ़कर समाज के लिए सार्वजनिक जीवन में एक नई यात्रा शुरू कर रही हैं। उनका मानना है कि बदलाव केवल विचारों से नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी और सार्थक प्रयासों से आता है।
हालांकि, उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा तेज है।
राजनीतिक जुड़ाव और परिवारिक पृष्ठभूमि
अनुपमा सरोज का परिवार राजनीति से गहरा जुड़ा रहा है। उनकी मां सुशीला सरोज 2004 में मोहनलालगंज लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। उनके पति अनुराग भदौरिया समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।
अनुपमा के पिता राम प्रकाश सरोज 1964 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। परिवारिक पृष्ठभूमि के चलते अनुपमा का राजनीति में आना एक स्वाभाविक कदम माना जा रहा है।
संगीत और समाज सेवा में सक्रियता
अनुपमा सरोज न केवल प्रशासनिक सेवाओं में बल्कि संगीत की दुनिया में भी पहचान रखती हैं। वह एक प्रसिद्ध पार्श्व गायिका हैं और सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। सिधौली क्षेत्र में उनके द्वारा लगवाए गए होर्डिंग्स भी चर्चा में रहे, जिनमें उन्होंने स्वयं को राज्य कर विभाग की पूर्व डिप्टी कमिश्नर और सामाजिक कार्यकर्ता बताया।
हाल ही में, यूपी कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने भी अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। ऐसे में अनुपमा सरोज का वीआरएस लेना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।
Source: NDTV India
