चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दिल्ली सहित सात राज्यों की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए मतदाताओं को राहत देने का निर्णय लिया है। आयोग ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी स्थिति में फंसे मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल होने का एक और अवसर प्रदान करें।
कौन से मतदाता होंगे लाभान्वित
यह अवसर उन मतदाताओं के लिए है जिन्हें ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट’ (ASDD) श्रेणी में चिह्नित किया गया था और जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गए। ऐसे मतदाता जिन्होंने अपने निवास स्थान को नहीं बदला है लेकिन समय पर गणना प्रपत्र जमा नहीं कर सके, वे अब विधिवत भरा हुआ प्रपत्र जमा कर सकते हैं।
जो मतदाता राज्य के भीतर किसी दूसरे पते पर चले गए हैं, उन्हें पता बदलने के लिए फॉर्म-8 भरने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपने नए पते और विधानसभा क्षेत्र का विवरण गणना प्रपत्र के साथ जमा कर सकते हैं।
बेघर मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था
जिन मतदाताओं के पास पते से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है और वे बेघर हैं, उनके मामले में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की फील्ड सत्यापन रिपोर्ट को निवास प्रमाण माना जाएगा। हालांकि, जो लोग SIR के दौरान नए मतदाता के रूप में नामांकन के लिए पहले ही फॉर्म-6 जमा कर चुके हैं, उन्हें दोबारा गणना प्रपत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी।
BLO ऐसे मतदाताओं के संपर्क में आने के लिए घर-घर जाकर मुलाकात करेंगे और व्हाट्सऐप, ई-मेल और SMS के जरिए भी संपर्क किया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) इन आवेदनों की जांच निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21(1) के तहत करेंगे। जिन आवेदनों को मंजूरी मिलेगी, उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा और उनका पुराना EPIC नंबर भी बरकरार रहेगा।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस फैसले को “यू-टर्न” बताते हुए आलोचना की है। पार्टी का आरोप है कि यह गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्वीकारोक्ति है और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई भी जारी है। यह फैसला लाखों प्रभावित मतदाताओं के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
Source: NDTV India
