पंजाब के मोगा में आम आदमी पार्टी के विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तलाशी के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय व्यापारी गुरतरन गोयल ने दावा किया कि उनकी दुकान को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत तोड़ा गया।
विधायक पर आरोप और प्रतिक्रिया
गुरतरन गोयल ने अपनी शिकायत में कहा कि उनकी मां मोनिका गोयल के नाम की दुकान को विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के इशारे पर गिराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने विधायक और उनके सहयोगियों से जुड़े कई संपत्ति घोटालों को उजागर किया था। गोयल ने शिकायत में पांच लोगों को नामजद किया है, हालांकि विधायक का नाम नहीं है।
विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गोयल का परिवार मेडिकल की दुकान चलाता है और 1998 से उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कई मामले चल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरा किसी तोड़फोड़ से कोई लेना-देना नहीं है।’
ईडी की जांच और आरोप
ईडी की जांच धरमकोट थाने में नवदीप सिंह, दिलकुश कुमारी और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी से संबंधित है। इसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे के रूप में गलत भुगतान का आरोप है।
ईडी का दावा है कि मुआवजे की राशि दिलकुश कुमारी के बैंक खाते में जमा हुई थी, जिसे फ्रीज कर दिया गया है। एजेंसी ने विधायक, उनके पति और सहयोगियों पर इस राशि के हेरफेर का आरोप लगाया है।
विधायक की सफाई
विधायक अमनदीप कौर ने इन आरोपों को भी नकारा। उन्होंने कहा कि जमीन रिकॉर्ड में हेराफेरी से उनका कोई संबंध नहीं है, क्योंकि यह मामला कांग्रेस शासन के दौरान का है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का किसी भी संपत्ति के कथित धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘मैंने इन संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड जुटा लिया है और खुद ईडी के सामने पेश करूंगी।’
Source: NDTV India
