छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें सूर्य देवता और छठी मइया की पूजा की जाती है। इस पर्व के दौरान संगीत का एक विशेष स्थान होता है, जो श्रद्धा और भक्ति से भरा होता है। इस वर्ष, शारदा सिन्हा का प्रसिद्ध गीत ‘पहिले-पहिल छठी मइया’ एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है।
गीत का महत्व
शारदा सिन्हा का यह गीत छठ महापर्व के सबसे भावुक और प्रिय गीतों में से एक माना जाता है। इसे उन महिलाओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिखा गया है, जो पहली बार छठ व्रत रख रही हैं। इस गीत में उनकी आस्था, श्रद्धा और समर्पण का सुंदर चित्रण किया गया है।
2016 में रिलीज होने के बाद से, यह गीत करोड़ों लोगों के दिलों में बस गया है। इसकी मधुर धुन और गहरी भावनाओं ने इसे हर घर में लोकप्रिय बना दिया है। यह गीत न केवल छठ पर्व के दौरान गाया जाता है, बल्कि इसे लोग अपने दैनिक जीवन में भी सुनते हैं।
छठ पर्व की विशेषताएँ
छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ भागों में मनाया जाता है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और इसमें व्रति महिलाएँ सूर्य देवता और छठी मइया की पूजा करती हैं। इस दौरान महिलाएँ कठिन व्रत रखती हैं, जिसमें निर्जला उपवास और विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग अर्पित करना शामिल है।
इस पर्व का आयोजन कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से प्रारंभ होता है और इसमें उगते और डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। इस समय महिलाएँ विशेष रूप से अपने परिवार के कल्याण की कामना करती हैं।
आगे क्या होगा?
जैसे-जैसे छठ महापर्व निकट आ रहा है, शारदा सिन्हा का ‘पहिले-पहिल छठी मइया’ गीत फिर से चर्चा में है। व्रति महिलाएँ इस गीत के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका ढूंढ रही हैं। इसके साथ ही, यह गीत नई पीढ़ी को भी छठ पर्व की गहराई और महत्व से अवगत कराने का कार्य कर रहा है।
इस प्रकार, शारदा सिन्हा का यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह छठ पर्व की समृद्ध परंपरा और संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आने वाले वर्षों में भी यह गीत लोगों के दिलों में अपनी विशेष जगह बनाए रखेगा।
Source: NDTV India
