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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की चरम सीमा, 9 क्षेत्रों में AQI 400 से अधिक

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है, जिससे लोगों की सांस लेना मुश्किल हो गया है। 6 नवंबर 2026 को सुबह 6 बजे के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 473 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा आरके पुरम में 441, अलीपुर और सोनिया विहार में 435-435, ओखला फेज-2 में 426, नॉर्थ कैंपस में 424, आईटीओ में 420, और नजफगढ़ में 412 AQI दर्ज किया गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत AQI 389 है, जो कि ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत चिंताजनक है। प्रदूषण के इस स्तर ने न केवल सांस लेने में कठिनाई पैदा की है, बल्कि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दे सकता है।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की बढ़ती समस्या

दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या एक गंभीर चिंता बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें निर्माण कार्य, वाहनों का बढ़ता जखीरा और मौसम के कारण होने वाली धुंध शामिल हैं। आने वाले दिनों में यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह और भी गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बाहर निकलते समय सावधानी बरतें और मास्क पहनें। साथ ही, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार ने भी इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न उपायों का सुझाव दिया है।

प्रदूषण नियंत्रण के उपाय

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम लागू करना शामिल है। इसके अलावा, वाहनों की संख्या को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, इन उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें और अपने स्तर पर भी प्रयास करें।

Source: BBC World News

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