दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों द्वारा स्थायी रूप से कब्जा जमाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्पष्ट राय दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर स्थायी कब्जा करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन इसके लिए समय सीमा का पालन करना आवश्यक है।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ा है। इन प्रदर्शनों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह टिप्पणी की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी विरोध स्थल पर स्थायी कब्जा नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि किसानों, पत्रकारों और अन्य सभी को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार समय सीमा के अंदर ही होना चाहिए।
सार्वजनिक स्थलों का महत्व
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों की अपनी एक अहमियत होती है और इन जगहों पर सभी नागरिकों की पहुंच बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समूह सिर्फ इसलिए किसी सार्वजनिक स्थल पर अन्य लोगों की आवाजाही नहीं रोक सकता, क्योंकि वहां उसका प्रदर्शन चल रहा है।
यह मामला जंतर-मंतर पर 17 दिनों तक चले प्रदर्शनों के संदर्भ में आया था। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन का अधिकार होते हुए भी, यह अधिकार अन्य लोगों के अधिकारों का हनन किए बिना होना चाहिए।
Source: BBC World News
