ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका द्वारा मिसाइल हमले की खबर ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका के मिडटर्म चुनाव चल रहे थे। इस हमले से पहले अमेरिका ईरान पर गुप्त रूप से छोटे हमले कर रहा था, लेकिन अब यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इजरायली दबाव और अमेरिकी कार्रवाई
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका पर ईरान के खिलाफ दबाव बढ़ाया था। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी चुनाव के दौरान ईरान पर हमला करने का दबाव था। ट्रंप ने चुनाव के दौरान संकेत दिया था कि वह ईरान पर हमला करने का विकल्प खुला रख रहे हैं।
मिडटर्म चुनाव के बाद यह हमला किया गया, जिससे यह साफ होता है कि इजरायल का दबाव रंग लाया। अमेरिका ने फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत किया है, जिसमें ‘यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट’ एयरक्राफ्ट कैरियर और मरीन सैनिकों को ले जाने वाले एम्फीबियस लैंडिंग जहाज शामिल हैं।
समझौते की उम्मीद और वेंस का बयान
इस हमले से कुछ घंटे पहले ही अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की उम्मीद जताई थी। उन्होंने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भी भेजा था और बताया कि इस मुद्दे पर उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से हाल ही में बातचीत हुई थी।
वेंस के अनुसार, ईरान के साथ कई अच्छे संवाद हुए हैं, जिससे समझौते की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, इस बीच हुए हमले ने इस संभावना को धूमिल कर दिया है।
मध्यवर्ती चुनाव का असर
अमेरिका में चल रहे मिडटर्म चुनावों के बीच इस हमले ने राजनीतिक माहौल को और गरम कर दिया है। चुनाव के दौरान ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई थी, लेकिन इस हमले के बाद स्थितियां बदल सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला अमेरिका की विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है और आने वाले दिनों में इसके कई राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
Source: BBC World News
