दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हिंसा, 170 से अधिक लोग घायल
दिल्ली में सोमवार को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के कारण 170 से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें से कई लोग केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस घटना में एक युवा महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटनाक्रम का विवरण
सोमवार को ‘चलो संसद’ मार्च का आयोजन किया गया था, जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग शामिल थे। इस मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। झड़पों के बाद, घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, लगभग 150 घायल व्यक्तियों को डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कम से कम 24 अन्य लोगों ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) में उपचार लिया।
घायलों की स्थिति
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती एक युवा महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उसे प्राथमिक उपचार के बाद आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। अन्य घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती घायलों में से कई ने बताया कि उन्हें पुलिस की कार्रवाई के दौरान चोटें आईं। कुछ घायलों ने यह भी कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि उनकी कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसक व्यवहार किया, जिसके कारण स्थिति बिगड़ गई। अधिकारियों ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने कहा है कि वे मामले की जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
समाज में प्रतिक्रिया
इस हिंसा की घटना ने समाज में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार हर नागरिक का है और इसे कुचलने का कोई अधिकार नहीं है।
कुछ राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास किया है और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। इस घटना ने नागरिक समाज में एक बार फिर से प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों को संघर्ष करना पड़ता है। घायलों की संख्या और उनकी स्थिति इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी। अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों को किस प्रकार संभाला जाता है।
