बांग्लादेश में दशकों बाद खसरे का सबसे घातक प्रकोप सामने आया है, जिसमें लगभग 1,000 बच्चों की मौत हो चुकी है। अस्पतालों में बच्चे गंभीर स्थिति में भर्ती हैं और उनके इलाज के लिए जगह कम पड़ रही है। ढाका के शिशु अस्पताल में रिमा अख्तर अपने नौ महीने के बेटे के पास बैठी हैं।
अस्पतालों में बच्चों की भीड़
रिमा अख्तर ने बताया कि उनके सामने ही एक बच्चे की मौत हो गई। उनका बेटा सबित हक भी खसरे से जूझ रहा है। मार्च से अब तक 986 बच्चों की मौत हो चुकी है और 180,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। खसरा अत्यधिक संक्रामक है और खांसी या छींक के माध्यम से फैलता है। इसका कोई विशेष इलाज नहीं है और यह बच्चों के लिए सबसे अधिक खतरनाक है।
बांग्लादेश में इस महामारी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन 1,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ रहे हैं।
माँ की चिंता
संजना इस्लाम मोदिना ने बताया कि वह अपने छह महीने के बेटे अयान के इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगा चुकी हैं। अयान के सिर पर खसरे के लाल चकत्ते हैं और उसकी हालत गंभीर है। पहले उसे निमोनिया था, फिर खसरा हो गया और अब वह शिशु अस्पताल में भर्ती है।
अयान को 15 दिन आईसीयू में रखा गया और अब वह खसरे के वार्ड में है। अस्पताल में 101 बच्चे खसरे से पीड़ित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश बच्चे बेहद कमजोर हैं और उन्हें कुपोषण भी है।
स्वास्थ्य अभियान की चुनौतियाँ
बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप ने स्वास्थ्य अभियान की कमजोरियों को उजागर किया है। प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य विशेष सहायक एसएम जियाउद्दीन हैदर ने इसे “विनाशकारी” बताया। देश में पहले टीकाकरण में काफी प्रगति हुई थी, लेकिन 2024 में प्रस्तावित खसरा अभियान राजनीतिक अस्थिरता के कारण स्थगित हो गया।
महामारी विज्ञानी महमूदुर रहमान ने सुझाव दिया कि व्यापक टीकाकरण अभियान की आवश्यकता है। उन्होंने संक्रमण को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने की भी सलाह दी।
