केंद्र सरकार ने हाल ही में बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाएंगे। इसके साथ ही, रुपे डेबिट कार्ड से की गई भुगतानों पर भी शुल्क लगाने से रोका गया है।
इस निर्णय के बाद, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र यूपीआई पर शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। गांधी ने कहा कि यह कदम आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालने का एक तरीका है। उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि यदि शुल्क लगाए जाते हैं, तो इससे लोगों को डिजिटल लेनदेन करने में कठिनाई हो सकती है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार की यह नीतियां गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए नुकसानदायक हैं। उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने के बजाय, सरकार इसे महंगा और जटिल बना रही है। इससे न केवल लोगों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यूपीआई और रुपे कार्ड के लिए शुल्क नहीं लगाया जाएगा, लेकिन राहुल गांधी का दावा है कि सरकार के इरादे ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही इस पर स्पष्टता नहीं दी, तो वे जनता के साथ मिलकर इसका विरोध करेंगे।
इस संदर्भ में, यह भी महत्वपूर्ण है कि यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाया है। यह प्रणाली न केवल सुविधाजनक है बल्कि वित्तीय समावेश को भी बढ़ावा देती है। ऐसे में अगर किसी प्रकार का शुल्क लगाया गया, तो यह प्रणाली की लोकप्रियता को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले समय में, यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और राहुल गांधी और उनकी पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों का क्या जवाब देती है।
