⚡ Breaking News

    पाकिस्तान बार काउंसिल के आठ सदस्यों ने नियमों में संशोधन का विरोध किया

    पाकिस्तान बार काउंसिल (पीबीसी) के आठ सदस्यों ने काउंसिल की कार्यवाहियों को गोपनीय बनाने के प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह कानूनी समुदाय का नियामक निकाय पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।

    सदस्यों की अपील

    पीबीसी सचिव को लिखे पत्र में आठ सदस्यों — आबिद शाहिद जुबेरी, मोहम्मद मकसूद बुट्टर, एम शफकत महमूद-चौहान, मुनीर अहमद काकर, अब्दुल सत्तार खान, सलमान अकबर राजा, सलाहुद्दीन अहमद और काजी मोहम्मद अरशद — ने कहा कि काउंसिल की सभी कार्यवाहियां सार्वजनिक होनी चाहिए क्योंकि यह एक निर्वाचित निकाय है जो पूरे कानूनी समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि “हम कोई निजी क्लब या गुप्त सरकारी एजेंसी नहीं हैं।” पत्र की एक प्रति पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान को भी भेजी गई, जो पीबीसी के पूर्व-आधिकारिक अध्यक्ष हैं।

    प्रस्तावित संशोधन का विवरण

    पीबीसी ने 1976 के पाकिस्तान लीगल प्रैक्टिशनर्स और बार काउंसिल्स नियमों के नियम 97 में संशोधन करके एक नया नियम 97-ए जोड़ने का प्रस्ताव किया है। इसके तहत काउंसिल और इसकी समितियों की कार्यवाहियों को गोपनीय और वर्गीकृत किया जाएगा।

    प्रस्तावित नियम के अनुसार, पीबीसी की सभी कार्यवाहियां, समितियां, प्राधिकरण के तहत गठित अन्य निकायों की जानकारी बिना काउंसिल या संबंधित समिति की स्पष्ट अनुमति के किसी को नहीं दी जा सकती।

    गोपनीयता पर आपत्ति

    आठ सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि काउंसिल की कार्यवाहियों को गोपनीय बनाने का प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 19 में गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19-ए में गारंटीकृत सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है।

    उन्होंने कहा कि काउंसिल एक निर्वाचित निकाय है और इसके सदस्य पूरे कानूनी समुदाय के वैधानिक प्रतिनिधि हैं, न कि कोई “निजी क्लब या गुप्त सरकारी एजेंसी”। इसलिए, सभी कार्यवाहियां पारदर्शी और सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *