ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच वर्षों से चल रहे विवाद ने हाल ही में एक नया मोड़ ले लिया है। इस विवाद के तहत, दोनों राज्य कोटिया ग्राम पंचायत के 28 गांवों में से 21 गांवों पर अपना अधिकार जताते हैं। यह मामला अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, और ओडिशा ने जनवरी 2022 में एक नया मुकदमा भी दायर किया था, जो अभी भी विचाराधीन है।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच विवाद का इतिहास
कोटिया ग्राम पंचायत के गांवों पर अधिकार को लेकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच का यह विवाद काफी पुराना है। दोनों राज्य अपने-अपने दावों को मजबूत करने के लिए विभिन्न कानूनी उपाय कर रहे हैं। इस विवाद ने स्थानीय निवासियों के जीवन को भी प्रभावित किया है, क्योंकि यह भूमि और संसाधनों के अधिकार से जुड़ा हुआ है।
ओडिशा सरकार ने इस मामले में अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कई बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाल ही में, नवीन पटनायक ने आंध्र प्रदेश द्वारा चुनावी नोटिस जारी करने के बाद इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना है कि इस तरह की चुप्पी से विवाद और बढ़ सकता है।
नवीन पटनायक की चिंताएं
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आंध्र प्रदेश के चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की चुप्पी और कार्रवाई से विवाद को सुलझाने के बजाय इसे और अधिक जटिल बना सकती है। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मामले में पारदर्शिता बरते और दोनों राज्यों के बीच संवाद को बढ़ावा दे।
पटनायक का मानना है कि अगर इस विवाद का समाधान समय पर नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र में तनाव और संघर्ष को बढ़ा सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से सहयोग करने का आह्वान किया है ताकि एक स्थायी समाधान निकाला जा सके।
आगे की राह
अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है, और ओडिशा सरकार की नई याचिका पर अदालत का निर्णय आने का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, न सिर्फ राजनीतिक स्थिरता के लिए, बल्कि स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए भी।
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, यह देखना होगा कि दोनों राज्य इस मुद्दे पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे विवाद को सुलझाने के लिए आपसी संवाद को बढ़ावा देंगे या राजनीतिक हितों के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे, यह भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न बना हुआ है।
Source: NDTV India
