इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने देश के ईरान, गाजा और मध्य पूर्व के अन्य क्षेत्रों में सैन्य अभियानों का बचाव किया। यह भाषण तब दिया गया जब अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा संभावित युद्ध अपराधों के लिए एक गिरफ्तारी वारंट प्रभाव में था।
बीबीसी की नाडा तवफीक ने बताया कि नेतन्याहू को संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलने के बाद गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। यह सवाल तब उत्पन्न होता है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई सदस्य युद्ध अपराधों के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं।
अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट की पृष्ठभूमि
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का गठन युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और जनसंहार के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। लेकिन कई देश, विशेष रूप से अमेरिका, इस अदालत को मान्यता नहीं देते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या वारंट का वास्तव में कोई प्रभाव है।
नेतन्याहू की यात्रा से पहले ही यह स्पष्ट था कि अमेरिका में उनके खिलाफ कोई गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका ने इस अदालत की वैधता को स्वीकार नहीं किया है।
नेतन्याहू का अमेरिका दौरा
नेतन्याहू ने अपने दौरे के दौरान न केवल इजरायल के हितों की रक्षा की, बल्कि उन्होंने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को भी मजबूत करने का प्रयास किया। अमेरिकी प्रशासन ने भी इस बात का ध्यान रखा कि नेतन्याहू की यात्रा बिना किसी विवाद के संपन्न हो।
इस प्रकार, अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट होने के बावजूद नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा सफल रही। यह मामला दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनीति अक्सर एक-दूसरे से टकराते हैं।
