भारत के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLSIU) के 34वें वार्षिक समर्पण समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने कानून के स्नातकों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कानूनी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को विभिन्न दृष्टिकोणों के साथ संवाद करने के लिए तैयार करना और समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कानूनी पेशा अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है और इसे अपनाने वालों को साहस और दृढ़ता की आवश्यकता होती है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज के समय में, एक वकील को न केवल कानून की जानकारी होनी चाहिए, बल्कि उसे सामाजिक मुद्दों और नैतिकता से भी अवगत होना चाहिए। यह आवश्यक है कि नए वकील समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार रहें।
समारोह में उपस्थित छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के सामने मुख्य न्यायाधीश ने यह बात भी की कि कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों को सिर्फ किताबों से सीखने के बजाय वास्तविक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दिशा में, उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से भी अपेक्षा की कि वे अपने छात्रों को इस तरह से प्रशिक्षित करें कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझ सकें।
मुख्य न्यायाधीश ने समर्पण समारोह के अंत में स्नातकों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें प्रेरित किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के उत्थान में करें। यह संदेश स्पष्ट था कि कानूनी पेशा केवल एक करियर नहीं है, बल्कि यह समाज की सेवा करने का एक माध्यम है।
Source: NDTV India
