फ्रेडरिक मर्ज़ की सरकार को समर्थन जुटाने की कोशिशों के बीच जर्मनी राजनीतिक अस्थिरता और पहचान संकट का सामना कर रहा है। स्थानीय चुनावों के परिणामों ने जर्मनी की सरकार को हिला कर रख दिया है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की स्थिति अब अस्थिर हो गई है और उनकी गठबंधन सरकार संकट में है। परंतु यह समस्या अचानक नहीं आई है, बल्कि वर्षों से इसके बादल मंडरा रहे थे।
जर्मनी की बदलती छवि
जर्मनी की पारंपरिक छवि अब धुंधली हो रही है। कभी राजनीति में स्थिरता का प्रतीक माने जाने वाला यह देश अब राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। अत्याधुनिक ऑटोमोबाइल निर्माण में अग्रणी जर्मनी की अर्थव्यवस्था अब पहले जैसी नहीं रही। यहां तक कि इसकी प्रसिद्ध ट्रेनों का समय पर न चलना भी लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है।
फ्रेडरिक मर्ज़ की पार्टी को हाल ही में बर्लिन में हार का सामना करना पड़ा, जबकि सैक्सनी-अन्हाल्ट में भी उनके समर्थन में कमी आई है। मर्ज़ की पार्टी मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया की संसद से बाहर हो गई है। हालांकि, उनके अपने केंद्र-दक्षिणपंथी CDU पार्टी में अभी तक कोई खुलकर चुनौती नहीं दे रहा है।
असंतोष और सुधार की आवश्यकता
मर्ज़ के समर्थकों का मानना है कि अब सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने और जनता से बेहतर संवाद स्थापित करने का समय आ गया है। जर्मनी की जनता का एक बड़ा हिस्सा उन्हें अहंकारी और जनता से कटा हुआ मानता है। यह समस्या सरकार के भीतर एक “संचार” समस्या के रूप में देखी जाती है।
मर्ज़ की सरकार ने 2025 में सत्ता में आने पर आव्रजन पर सख्ती और आर्थिक सुधार का वादा किया था। कुछ हद तक उन्होंने इसमें सफलता भी प्राप्त की है, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती लागत और चीन के प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
विकल्प और राजनीतिक ध्रुवीकरण
इस बीच, जर्मनी की राजनीति में एक नया विकल्प उभर रहा है – अल्टरनेटिव फर डॉयचलैंड (AfD)। यह पार्टी अपनी रूस समर्थक नीतियों और दक्षिणपंथी चरमपंथी शाखाओं के लिए जानी जाती है। हाल ही में इसने मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में चुनाव जीतकर अपनी शक्ति को और भी बढ़ाया है।
AfD के सह-नेता एलिस वेडेल का दावा है कि मर्ज़ के दिन गिने जा चुके हैं। इस पार्टी ने पूर्वी जर्मनी में अपनी मजबूत पकड़ बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 28% समर्थन प्राप्त कर लिया है। लेकिन राजधानी बर्लिन में यह दी लिंके पार्टी थी जिसने चुनाव में बढ़त बनाई, जिससे जर्मनी की पारंपरिक पार्टियों के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।
ये चुनाव जर्मनी के राजनीतिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों और चुनौतियों को उजागर करते हैं, जो देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
