इंदिरा गांधी कला केंद्र, जिसे भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था, अब पांच वर्ष बाद भी अपने स्थायी स्थान का इंतज़ार कर रहा है। इस विषय में हाल ही में एक पत्र संस्कृति सचिव को लिखा गया है, जिसमें इस देरी की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह पत्र अक्टूबर के पहले सप्ताह में भेजा गया था। पत्र में बताया गया है कि राष्ट्रीय कला केंद्र को तीन वर्ष पहले भूमि आवंटित की जानी थी, लेकिन यह प्रक्रिया अब भी लंबित है। इस देरी से कला केंद्र की गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए स्थायी स्थान की आवश्यकता है।
इंदिरा गांधी कला केंद्र की स्थापना भारतीय संस्कृति और कला को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ इस संस्थान के लिए स्थायी स्थान की अनुपस्थिति ने इसकी कार्यप्रणाली में बाधाएँ उत्पन्न की हैं। इसकी आवश्यकता और महत्व को समझते हुए, कला प्रेमियों और कलाकारों ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है।
इस संबंध में संस्कृति मंत्रालय की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। कला केंद्र के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जल्द ही भूमि आवंटित नहीं की जाती है, तो यह संस्थान अपनी गतिविधियों को जारी रखने में असमर्थ हो सकता है।
अगले कदम के रूप में, कला केंद्र के प्रतिनिधियों ने सरकार से अपील की है कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता दे और जल्द से जल्द एक स्थायी स्थान का आवंटन सुनिश्चित करे। ऐसा करने से न केवल केंद्र की गतिविधियों को पुनर्जीवित किया जा सकेगा, बल्कि यह भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण में भी मददगार साबित होगा।
Source: NDTV India
