हाल ही में नोएडा में हुई एक त्रासदी के संदर्भ में, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने प्रदेश सरकार के अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे 13 अक्टूबर, 2026 से पहले एक हलफनामा दाखिल करें। इस हलफनामे में उत्तर प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में जारी स्लीपर बस परमिटों की संख्या का खुलासा करने के साथ-साथ यह भी बताया जाए कि क्या निर्धारित मानकों की जांच की गई थी जब ये परमिट जारी किए गए थे।
इस आदेश का संदर्भ उस घटना से जुड़ा है जिसमें कई लोगों की जान गई थी, और यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि स्लीपर बसों की सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। न्यायालय ने यह भी संज्ञान लिया है कि इन बसों के परिचालन में कितनी लापरवाही बरती जा रही है।
स्लीपर बसों की सुरक्षा मानक
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि स्लीपर बसों के संचालन में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। यह निर्देश इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए दिया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्लीपर बसों के संचालन में लापरवाही का सीधा असर यात्रियों की जान पर पड़ता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि राज्य सरकार सख्त कदम उठाए और सभी बसों की नियमित जांच कराए ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
आगे की प्रक्रिया और संभावित कदम
इस स्थिति में सुधार लाने के लिए, हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच शीघ्रता से की जाए। इसके साथ ही, प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सभी संबंधित स्टाफ को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।
जैसे ही हलफनामा दाखिल किया जाएगा, न्यायालय उस पर विचार करेगा और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं।
