हाल ही में एनडीटीवी द्वारा आयोजित रक्षा शिखर सम्मेलन 2026 में, भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एक महत्वपूर्ण विचार साझा किया। उन्होंने युद्ध के परिदृश्य में सूचना युद्ध की भूमिका पर चर्चा की और बताया कि कैसे सोशल मीडिया पर चलने वाले नरेटिव्स ने वास्तविकता को धुंधला कर दिया है।
युद्ध में सूचना की भूमिका
जनरल सेठ ने कहा कि आजकल युद्ध के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक के बाद एक हमले होते हैं। ये हमले न केवल सूचना के माध्यम से होते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि लोग वास्तविक स्थिति को समझने में भ्रमित रहें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सूचना युद्ध वास्तविक लड़ाई की तस्वीर को धुंधला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा, “हम देखते हैं कि कई बार सोशल मीडिया पर चलने वाली सूचनाएँ और नरेटिव्स युद्ध की वास्तविकता से भिन्न होती हैं। यह युद्ध के मैदान में अनिश्चितता और भ्रम पैदा करता है, जो अंततः युद्ध के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।” जनरल सेठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि सूचना युद्ध की इस स्थिति का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत और स्पष्ट रणनीति की आवश्यकता है।
भूमि की महत्वता
जनरल सेठ ने युद्ध में भूमि के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भूमि हमेशा युद्ध की जीत का एक ठोस कारक रहेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भले ही तकनीकी और सूचना का युद्ध महत्वपूर्ण हो, लेकिन अंततः यह भूमि ही है जो विजय का निर्धारण करती है।
उनका यह बयान समय की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आधुनिक युद्धों में तकनीकी उपकरणों और सूचना प्रणाली की भूमिका बढ़ी है। फिर भी, जनरल सेठ ने यह सुनिश्चित किया कि जब बात युद्ध की होती है, तो भौगोलिक स्थिति और भूमि का नियंत्रण सर्वोपरि है।
आगे का रास्ता
यह सम्मेलन न केवल वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करता है, बल्कि भविष्य के लिए रणनीतियों की रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है। जनरल सेठ का यह विचार कि भूमि का नियंत्रण ही युद्ध की जीत का आधार है, सभी सैन्य रणनीतिकारों और नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
आगामी वर्षों में, सेना के आधुनिकीकरण और सूचना युद्ध के प्रति सजग रहने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही, भूमि के महत्व को ध्यान में रखते हुए सैन्य योजनाओं को तैयार करना आवश्यक होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय सेना तकनीकी और पारंपरिक दोनों दृष्टिकोणों का संतुलन बनाए रखे।
