दक्षिण अफ्रीका के एकुरहुलिनी क्षेत्र में हाल ही में महिलाओं की हत्याओं की घटनाओं ने पूरे देश में भय और आक्रोश फैला दिया है। यह घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा कितनी आम हो गई है।
परिवारों का दुख और आक्रोश
नोकवांडा मत्शिकिज़ा अपनी भतीजी दीनेओ मोटापाने की हत्या के बारे में सोचते हुए कहती हैं कि “हम क्या करेंगे, मुझे नहीं पता, लेकिन कुछ करना होगा।” उनके परिवार ने दो दिन पहले ही दीनेओ की पहचान की थी, जिनका शरीर एकुरहुलिनी में जला हुआ और बुरी तरह से क्षत-विक्षत पाया गया।
इसी तरह थेम्बा केकाना भी अपनी बहन इतुमेलेन्ग की मौत से सदमे में हैं, जिनका शरीर जुलाई में मिला था। यह हत्याएं देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा की गवाही देती हैं।
सरकारी प्रतिक्रिया और अमनेस्टी इंटरनेशनल का बयान
दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने पिछले साल लैंगिक-आधारित हिंसा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया था। इसके बावजूद, हाल की घटनाओं ने सरकार पर और दबाव डाला है।
अमनेस्टी इंटरनेशनल ने फेमिसाइड को एक अलग अपराध के रूप में मान्यता देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह महिलाओं के लक्षित हत्या का सही रूप से सामना करने का एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
समाज की प्रतिक्रिया और आगे की राह
लोगों का कहना है कि पुलिस को अधिक सक्रिय होना चाहिए और सरकार को सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। कई महिलाएं अब खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से डरती हैं।
जेंडर और सामाजिक न्याय की वकील लेबोगांग रामोफोको का मानना है कि यह समस्या केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा की नहीं, बल्कि मानवता के प्रति उदासीनता की भी है।
