ब्रिक्स देशों का सम्मेलन 2026 का आयोजन हाल ही में हुआ, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। यह सम्मेलन दो दिनों तक चला और इसका मुख्य विषय था “नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में उचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को मजबूत करना।” इस विषय के अंतर्गत ब्रिक्स देशों ने सतत ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाने के लिए अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन की मुख्य चर्चाएँ
सम्मेलन में प्रमुख रूप से ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। ब्रिक्स देशों ने मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का संकल्प लिया कि वे वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना करने में एकजुट रहें। इसके अलावा, नागरिक न्यूक्लियर सुविधाओं पर हुए हमलों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की गई, जो कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।
ब्रिक्स देशों ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिक न्यूक्लियर सुविधाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, खासकर जब से इसे आतंकवाद और अन्य खतरों से बचाने की आवश्यकता बढ़ गई है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसी सुविधाओं की सुरक्षा केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आगे की दिशा
इस सम्मेलन के परिणामस्वरूप, ब्रिक्स देशों ने एक साझा रोडमैप तैयार करने की योजना बनाई है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा के विकास और नागरिक न्यूक्लियर सुविधाओं की सुरक्षा को शामिल किया जाएगा। इस रोडमैप के अंतर्गत भविष्य में होने वाले सम्मेलनों में इन मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी।
ब्रिक्स देशों ने सहयोग बढ़ाने और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने का आश्वासन दिया। इस प्रकार, ब्रिक्स सम्मेलन ने न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया।
