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असम बीजेपी ने हर 5 साल में एसआईआर की मांग की, राज्य मंत्री ने बताया कारण

असम की राजनीति में हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक राज्य मंत्री जयंत मल्ला बरुआह ने कांग्रेस पार्टी पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने चुनावी हार के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को दोषी ठहरा रही है। यह बयान उस समय आया है जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष को चुनौती दी थी कि वह चुनाव बैलट पेपर का उपयोग करके लड़ें।

कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार

जयंत मल्ला बरुआह ने कांग्रेस के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी पार्टी चुनाव हारती है, वे ईवीएम को दोषी ठहराते हैं। यह बयान कांग्रेस के लिए एक स्पष्ट चुनौती है, खासकर जब बीजेपी ने हाल ही में अपने चुनावी प्रदर्शन में वृद्धि की है। बरुआह का कहना है कि असम में बीजेपी का हर चुनाव में लगातार जीतना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी का जनाधार मजबूत है।

मुख्यमंत्री की चुनौती

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि यदि विपक्ष को ईवीएम पर भरोसा नहीं है, तो उन्हें बैलट पेपर का प्रयोग करना चाहिए। यह बयान न केवल विपक्ष के लिए एक चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बीजेपी अपनी चुनावी प्रक्रिया को लेकर कितनी आत्मविश्वासी है।

भविष्य की चुनावी रणनीति

असम बीजेपी ने हर पांच साल में एसआईआर (सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण) कराने की भी मांग की है। पार्टी का मानना है कि इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि जनता की वास्तविक जरूरतें क्या हैं। इस रणनीति के पीछे का उद्देश्य यह है कि कार्यक्रमों और नीतियों को जनता की आवश्यकताओं के अनुसार ढाला जा सके।

महत्व और भविष्य की दिशा

इस मांग का महत्व इस बात में निहित है कि यह जनता से सीधे जुड़ने का एक तरीका है। यदि बीजेपी इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो यह न केवल उनकी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने में भी मदद मिल सकती है।

इस प्रकार, असम की राजनीति में ये घटनाक्रम न केवल वर्तमान स्थिति को दर्शाते हैं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

Source: NDTV India

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