दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस सांसद, डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम की बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के संदर्भ में आया है।
आरोपों की पृष्ठभूमि
डॉ. अकोइजम पर इस वर्ष मई में 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। छात्राओं का आरोप था कि प्रोफेसर उन्हें बैठकों और कार्यक्रमों के बहाने अपने कैंपस स्थित घर पर बुलाकर यौन उत्पीड़न का प्रयास करते थे। इसके अलावा, कुछ छात्राओं ने कक्षाओं में अश्लील और अमर्यादित टिप्पणियाँ करने के आरोप भी लगाए थे।
हालांकि, डॉ. अकोइजम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और उनका कहना है कि यह उनके खिलाफ एक साजिश है।
कानूनी कार्यवाही और पुलिस जांच
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने डॉ. अकोइजम के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस एफआईआर में यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने से संबंधित धाराएँ लगाई गई हैं।
पुलिस ने पिछले महीने डॉ. अकोइजम से लगभग पांच घंटे तक पूछताछ की थी और उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन जारी किया था।
डॉ. अकोइजम का बयान
दिल्ली आते समय डॉ. अकोइजम ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और इसे उन्होंने अपने लोगों के साथ दशकों से हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत करार दिया था।
डॉ. अकोइजम की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट की रोक से उन्हें अस्थायी राहत मिली है, लेकिन मामले की सुनवाई अभी भी जारी रहेगी।
Source: BBC World News
