पिनाराई विजयन के नेतृत्व में केरल सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) के संबंध में किए गए एक ताजा अध्ययन ने कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट को वी.डी. सतीशन द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो कि विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। रिपोर्ट में पाया गया है कि KIIFB ने अपने कर्मचारियों की संख्या में भारी वृद्धि की है, जो कि सिर्फ 40 स्वीकृत पदों से बढ़कर 498 कर्मचारियों तक पहुँच गई। यह वृद्धि बिना किसी सरकारी अनुमोदन के की गई है, जो कि स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
अनियमितताओं का खुलासा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि KIIFB ने एक ही वित्तीय वर्ष में प्रचार-प्रसार पर ₹203.72 करोड़ खर्च किए। यह राशि एक सामान्य सरकारी नीति के अंतर्गत नहीं आती है और इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी राशि का खर्च उचित था। इसके अलावा, KIIFB ने अपने लिए खुद ही उधारी की गारंटी को मंजूरी दी, जो और भी अधिक चिंता का विषय है।
सरकारी नियमों का उल्लंघन
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी संस्थान को अपनी कर्मचारी संख्या या वित्तीय खर्च में बदलाव करने के लिए पहले से अनुमोदन लेना आवश्यक है। लेकिन KIIFB ने बिना किसी अनुमति के अपनी संरचना में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं। यह अनियमितताएँ न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि कैसे एक संस्था अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ
इस रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही की मांग की है। सतीशन ने कहा है कि इन अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। यह मामला न केवल एक राजनीतिक विवाद का कारण बन सकता है, बल्कि यह लोगों के विश्वास को भी प्रभावित करेगा, जो सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं।
आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। क्या सरकार इस रिपोर्ट पर कार्रवाई करेगी या इसे नजरअंदाज कर देगी? यह सवाल अब केरल की राजनीति में गर्मागर्म बहस का विषय बन गया है।
Source: NDTV India
