अंकिता भंडारी के माता-पिता, जो उनकी हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे थे, को दिल्ली में एक रातभर के प्रदर्शन के बाद रिहा किया गया। प्रदर्शन का आयोजन उन लोगों ने किया था जो अंकिता की हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे थे।
अंकिता भंडारी ने ऋषिकेश में एक रिसॉर्ट, वंतरा में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम किया था। उनकी हत्या 18 सितंबर, 2022 को हुई थी। चार दिन बाद, 22 सितंबर को, उनकी लाश एक नाले से बरामद की गई थी। इस मामले ने पूरे देश में जनाक्रोश पैदा कर दिया था।
अंकिता की हत्या के संदर्भ में, यह बताया गया है कि उनके माता-पिता ने कई बार स्थानीय प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई थी। उनके माता-पिता ने आरोप लगाया कि अंकिता की हत्या से जुड़े मामलों की उचित जांच नहीं की जा रही है।
प्रदर्शन का उद्देश्य और उसकी पृष्ठभूमि
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में एकत्र होकर अंकिता के माता-पिता के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने अपनी आवाज को उठाने के लिए रातभर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन तब आयोजित किया गया जब यह ज्ञात हुआ कि उत्तराखंड के राज्यपाल ने एक विवादित पद पर नियुक्ति की है, जिससे अंकिता के माता-पिता और उनके समर्थन करने वालों में आक्रोश व्याप्त हो गया।
प्रदर्शन में भाग लेने वालों ने न केवल अंकिता के माता-पिता के प्रति समर्थन व्यक्त किया बल्कि राज्य सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने यह मांग की कि अंकिता के मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जानी चाहिए।
आगे की कार्रवाई और न्याय की उम्मीद
अंकिता के माता-पिता ने प्रदर्शन के बाद अपनी आवाज को उठाते हुए कहा कि वे न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे मामले की जांच को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। यह मामला देश में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था पर सवाल उठाता है, और इसे व्यापक रूप से देखा जा रहा है।
अंकिता की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता बढ़ी है। इस मामले ने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। अब यह देखना होगा कि क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
Source: NDTV India
