अमेरिका में सार्वजनिक फांसी की प्रथा लगभग एक सदी पहले समाप्त हो गई थी। अब यह फिर से चर्चा में क्यों है? 1936 में केंटकी में एक काले व्यक्ति रैनी बेथेया की फांसी ने इस प्रथा को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ओवेन्सबोरो में हुए इस आखिरी बड़े सार्वजनिक फांसी के आयोजन ने राज्य में काफी विवाद उत्पन्न किया था, जिसके बाद फांसी की सार्वजनिक प्रथा पर रोक लगा दी गई।
1936 की घटना और उसके प्रभाव
14 अगस्त 1936 का दिन था जब ओवेन्सबोरो में हजारों लोग एकत्रित हुए थे। यह गर्मियों का एक तपता हुआ दिन था, जब रैनी बेथेया को एक वृद्ध विधवा के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में फांसी दी गई थी। इस घटना ने न केवल केंटकी बल्कि पूरे अमेरिका में एक सामाजिक बहस को जन्म दिया।
फांसी के समय, वहां लगभग 20,000 लोग उपस्थित थे। इस घटना के बाद केंटकी के गवर्नर ने सार्वजनिक फांसी पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही, अमेरिका के अन्य राज्यों में भी फांसी को निजी बनाने का प्रयास शुरू हो गया।
वर्तमान में सार्वजनिक फांसी की चर्चा
करीब 90 साल बाद, अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने निडाल हसन की सार्वजनिक फांसी की घोषणा की है। हसन ने 2009 में फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर अपने 13 साथियों की हत्या कर दी थी। इस फांसी को लाइव-स्ट्रीम करने की योजना है, जो समाज में नई बहस को जन्म दे रही है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के प्रोफेसर माइकल रेडलेट ने इस निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में मृत्युदंड के लिए समर्थन कम हो रहा है। 1994 में यह समर्थन 80% था, जो अब 52% तक गिर गया है।
समाज और राजनीति पर प्रभाव
इस निर्णय को लेकर समाज में विरोधाभास है। कुछ लोग इसे न्याय के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य इसे अमानवीय मानते हैं। ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कर्ट ग्रे का मानना है कि कुछ अमेरिकियों में हिंसा के प्रति संवेदनशीलता कम हो गई है।
वॉयलेंस प्रिवेंशन रिसर्च प्रोग्राम के निदेशक गारन विंटेम्यूट का कहना है कि अमेरिका में हिंसा के प्रति रुझान घट रहा है। उन्होंने कहा, “एक सार्वजनिक फांसी हमारे देश की पहचान नहीं है।”
इस मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया है, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वांस इस लाइव-स्ट्रीम को नहीं देखेंगे।
Source: BBC World News
