आईआईटी-बॉम्बे के छात्र सahil वाकोडे की आत्महत्या के मामले में उनके माता-पिता ने कहा है कि उनके बेटे ने पहले जाति आधारित भेदभाव के बारे में उन्हें बताया था। सahil के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को यह समझाने की कोशिश की कि आईआईटी में प्रवेश प्राप्त करना बहुत कठिन है।
पिता ने कहा, “मैंने उसे कहा कि यह कठिन है, इसलिए उसे इसे सहन करना चाहिए।” यह बयान उस समय आया है जब सahil की आत्महत्या ने शिक्षा प्रणाली में जाति आधारित भेदभाव के मुद्दे को फिर से उजागर किया है।
सahil के माता-पिता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। उनके अनुसार, उनका बेटा मानसिक तनाव से गुजर रहा था और उन्हें उसकी स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था।
माता-पिता ने कहा कि सahil ने उन्हें हमेशा यह विश्वास दिलाया कि वह अपनी पढ़ाई में अच्छा कर रहा है और किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना कर रहा है। हालांकि, उनकी आत्महत्या ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह अंदर से कितना संघर्ष कर रहा था।
इस घटना ने कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है और इसे संबोधित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। शिक्षा संस्थानों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सभी छात्रों को एक समान अवसर मिले और उन्हें किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े।
