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Manipur Kuki Vs Naga Violence Photos Update; Assam Rifles Attack


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इम्फाल13 घंटे पहलेलेखक: डी. कुमार

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मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि दी। - Dainik Bhaskar

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है। राज्य में जारी हिंसा अब नगा और कुकी समुदायों के बीच शिफ्ट हो गई है। उखरुल इसका हॉटस्पॉट बन गया है।

इस साल फरवरी से शुरू हुए इस ताजा संघर्ष में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत-म्यांमार सीमा की निगरानी करने वाली असम राइफल्स के काफिले पर सोमवार को हुआ हमला भी इसी का नतीजा बताया जा रहा है। इस हमले में उत्तराखंड के दो जवान शहीद हो गए थे।

दोनों शहीद जवानों को गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इंफाल एयरपोर्ट पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव भेज दिया गया।

उखरुल में उग्रवादियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते असम राइफल्स के जवान।

उखरुल में उग्रवादियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते असम राइफल्स के जवान।

असम राइफल्स पर कुकी समुदाय के प्रति नरमी का आरोप

दरअसल, नगा का आरोप है कि असम राइफल्स भारत-म्यांमार की 398 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित रखने में नाकाम रही है। नगा समुदाय के लोग असम राइफल्स पर कुकी समुदाय को लेकर नरमी का आरोप लगाते रहे हैं।

उनका कहना है कि म्यांमार की तरफ से हथियारबंद गुट ‘कुकी नेशनल आर्मी (बर्मा)’ लगातार सीमा पार कर नगा गांवों पर हमले कर रही है। यह नाराजगी छह अगवा नगा लोगों के क्षत-विक्षत शव 10 जून को मिलने और कामजोंग जिले में नगा गांवों को जलाए जाने के बाद और बढ़ गई।

पिछले 14 दिनों में हुई सख्त कार्रवाई से हताशा में उग्रवादी

  • असम राइफल्स ने काफिले पर हमले को उग्रवादी समूहों की हताशा बताया। दरअसल, असम राइफल्स लगातार आक्रामक रुख बनाए हुए है। चार दिन पहले ही थोयी और जालेनबुंग गांवों में उग्रवादियों के दो बड़े बंकरों को नष्ट किया था।
  • वहीं, 28 जून से 4 जुलाई तक संयुक्त अभियान में सेना ने भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया था और तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया था। स्थिति को संभालने के लिए कई बफर जोन बनाए गए हैं।
  • असम राइफल्स के काफिले पर हमले के बाद सेना ने पूरे इलाके में बड़ा तलाशी अभियान चलाया है। सेना और पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जवानों पर हमला करने वाले उग्रवादी नेटवर्क को खत्म करके ही वे दम लेंगे।
  • सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बाधा डालने वालों, विशेषकर महिलाओं को आगे कर रास्ता रोकने वालों से अब सख्ती से निपटा जाएगा। पूरे राज्य में नियंत्रण स्थापित करने के लिए इंफाल घाटी और पहाड़ी जिलों में 113 नाके बनाए गए हैं।

34 साल से जारी संघर्ष: आखिरी क्या है कुकी और नगा समुदायों में विवाद

  • 1992-1998 का नगा-कुकी जातीय संघर्ष जमीन पर वर्चस्व और उग्रवादी गुटों की जबरन वसूली को लेकर शुरू हुआ था।
  • इस संघर्ष का सबसे काला दिन 13 सितंबर 1993 था, जब ‘जौपी हत्याकांड’ में संदिग्ध नगा उग्रवादियों ने 115 कुकी नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
  • कुकी समुदाय आज भी इसे ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाता है। बीते छह साल में दोनों पक्षों के 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

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