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Punjab Congress Leader Sukjinder Randhawa Slams High Command; Party Damage Control Fails


सुखजिंदर सिंह रंधावा बोले- फैसला पहले से तय था तो बैठकों का क्या मतलब।

पंजाब कांग्रेस में प्रधान पद को लेकर मचे विवाद के बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पहली बार खुलकर पार्टी हाईकमान पर सवाल उठाए हैं। रंधावा ने कहा कि कई दौर की बैठकों, लंबी मशक्कत और नेताओं से अलग-अलग बातचीत के बावजूद आखिर वही फैसला लागू किया गया, जो

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ऐसे में पूरी कवायद का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर यही निर्णय लेना था तो हाईकमान को पहले दिन ही साफ शब्दों में एक लाइन का आदेश जारी कर देना चाहिए था कि यही अंतिम फैसला है, जिसे मंजूर हो वह पार्टी में रहे और जिसे मंजूर न हो, वह अपना रास्ता चुन सकता है।

गृहमंत्री अमित शाह से अपनी मुलाकात को लेकर कहा कि इस मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं थी। उनका गुरदासपुर-पठानकोट का निर्वाचन क्षेत्र सीधे पाकिस्तान बॉर्डर से सटा हुआ है, जहां सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं। अगर मुझे कोई राजनीतिक सेटिंग करनी होती, तो मैं सीधे उनके ऑफिस में जाता या फिर काले शीशे वाली गाड़ी में छिपकर जाता।

पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद रंधावा ने कही अहम बातें…

हाईकमान को देना चाहिए था वन-लाइन ऑर्डर: हालिया सूची पर मचे बवाल और अपनी नाराजगी पर खुलकर बात करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जब तीन-चार दौर की लंबी बैठकें हो चुकी थीं, तो उसके बाद भी ऐसी नाराजगी सामने आना लीडरशिप का सबसे बड़ा फॉल्ट है। उन्होंने कहा- इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात हुई, राहुल गांधी ने सभी को अलग-अलग बुलाकर चर्चा की और केसी वेणुगोपाल ने भी कई बार संवाद स्थापित किया। इसके बाद मुझे और चरणजीत सिंह चन्नी को बुलाया गया था। जब इतनी लंबी कवायद के बाद भी वही फैसला करना था, जो चार महीने पहले ही तय हो चुका था और जिस पर सभी ने हस्ताक्षर कर दिए थे, तो इस पूरी एक्सरसाइज की क्या जरूरत थी? हाईकमान को पहले दिन ही कड़ा रुख अपनाते हुए एक लाइन का आदेश जारी करना चाहिए था कि यह हमारा आखिरी फैसला है, जिसे मंजूर है वह रहे, जिसे नहीं मंजूर वह जा सकता है।

इंदिरा-राजीव की कांग्रेस को याद कर रहे लोग: रंधावा ने कहा कि आज पार्टी के भीतर जो वफादार और सच्चे कांग्रेसी हैं, उन्हें जानबूझकर इग्नोर किया जा रहा है। यही वजह है कि आज लोग इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय की कांग्रेस को याद करते हैं, जब मात्र तीन जनरल सेक्रेटरी पूरी पार्टी को संभाल लेते थे, जबकि आज पदाधिकारियों की फौज होने के बावजूद दिल्ली में बैठे लोग डैमेज कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा- मुझे चन्नी, राजा वडिंग या ए, बी, सी, डी किसी के भी अध्यक्ष बनने से कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत इस बात से है कि इतनी कंट्रोवर्सी के बाद यह निर्णय लिया गया।

जो हो रहा उसके लिए दिल्ली में बैठे लोग जिम्मेदार: रंधावा ने कहा- आज जो वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं, उन्हें देखकर हमें खुद शर्म आ रही है। विरोधी हमारा मजाक उड़ा रहे हैं और कार्यकर्ता पूरी तरह टूट चुका है। मैं हमेशा पार्टी के प्रति वफादार रहा हूं; जब राजस्थान में छोटी सी बात होती है, तो मैं तुरंत वहां जाकर स्थिति संभालता हूं। उन्होंने अंत में कहा कि जिन नेताओं ने अपनी पूरी जिंदगी कांग्रेस को दे दी, नेतृत्व को उनकी बात सुननी चाहिए थी, और आज जो भी नुकसान हो रहा है, उसकी पूरी गलती दिल्ली में बैठे नेतृत्व की है।

सेटिंग करनी होती तो काले शीशे वाली गाड़ी में जाता: केंद्रीय गृहमंत्री से अपनी मुलाकात को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों पर रंधावा ने कहा कि इस मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं थी। उनका गुरदासपुर-पठानकोट का निर्वाचन क्षेत्र सीधे पाकिस्तान बॉर्डर से सटा हुआ है, जहां सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, जिसके बाद पीएम के निर्देश पर ही वे गृहमंत्री से सुरक्षा संबंधी मीटिंग के लिए मिले थे। रंधावा ने तंज कसते हुए कहा- अगर मुझे कोई राजनीतिक सेटिंग करनी होती, तो मैं सीधे उनके ऑफिस में जाता या फिर काले शीशे वाली गाड़ी में छिपकर जाता।

पार्टी से पहले अपने लोगों के प्रति जवाबदेह: सुखजिंदर रंधावा ने कहा- मैं पार्टी से पहले अपने उन लोगों के प्रति जवाबदेह हूं, जिन्होंने मुझे वोट दिया है। अपने से पहले मुझे उनकी सुरक्षा की चिंता है। उनकी सुरक्षा के लिए गृहमंत्री से मिला। भाजपा नेता तरुण चुघ से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि वे पंजाब भाजपा के नेता हैं और बाहर मिले थे; राजनीति में शिष्टाचार के नाते मिलना स्वाभाविक है, अगर सुखबीर बादल भी मिलेंगे तो मैं उनसे भी मिलूंगा।

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बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की तरह पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से 8 महीने पहले ही टूट के आसार बने हुए हैं। पूर्व CM व जालंधर से सांसद चरणजीत चन्नी के बगावती तेवर देख कांग्रेस हाईकमान एक्टिव हो गया है। दिल्ली से एक सीनियर नेता ने चन्नी को कॉल कर अभी कोई बड़ा कदम न उठाने को कहा है। (पढ़ें पूरी खबर)



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