हर साल दिवाली के पश्चात गोवर्धन पूजा का त्योहार बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा करने की परंपरा है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 9 नवंबर को मनाने की बात कर रहे हैं, जबकि अन्य 10 नवंबर को।
गोवर्धन पूजा की सही तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:32 बजे से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन 10 नवंबर को दोपहर 2:01 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
गोवर्धन पूजा की विधि
गोवर्धन पूजा के दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और इसे फूलों से सजाया जाता है। शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण और अन्य देवताओं की पूजा की जाती है। पूजन के दौरान भगवान को धूप, दीप, फल, फूल, अक्षत, चंदन और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।
इस दिन पशुधन जैसे गाय और बैल की पूजा का भी विधान है। गोवर्धन आकृति के नाभि स्थल पर दीपक रखा जाता है, जिसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे डाले जाते हैं। पूजा के पश्चात इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था। पौराणिक कथा के अनुसार, गोकुल और ब्रज के लोग अच्छी बारिश और समृद्धि के लिए इंद्र की पूजा करते थे।
भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि गोवर्धन पर्वत और गौ माता का उनके जीवन में विशेष स्थान है, इसलिए उनकी पूजा करनी चाहिए। इंद्र इस बात से नाराज हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार बारिश कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी को सुरक्षित किया।
Source: NDTV India
