पंजाब के मादक पदार्थ विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का रविवार को उनके पैतृक गांव मानसा में अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। झोटा की हत्या 13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी। घटना के दौरान वह फेसबुक पर लाइव थे, जब उन्होंने स्टोर मालिक से नशे की दवाओं की बिक्री पर सवाल किया था। इसके बाद स्टोर मालिक ने झोटा पर गोली चला दी थी, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
संघर्ष और न्याय की मांग
झोटा के परिवार और समर्थकों ने उनकी हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। इस दौरान परिवार ने 22 दिन तक धरना दिया और पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था। पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद परिवार ने पोस्टमार्टम के लिए सहमति दी और इसके बाद झोटा का शव चंडीगढ़ से मानसा लाया गया।
संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी), जिसे परविंदर सिंह झोटा इंसाफ एक्शन कमेटी भी कहा जाता है, ने इस मामले में प्रमुख भूमिका निभाई। परिवार ने सरकार से झोटा के नाम पर एक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने और घटना में घायल चार लोगों को मुआवजा देने की मांग की थी। इन मांगों पर सरकार ने सहमति जताई थी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सरकारी कदम
झोटा की हत्या के बाद पंजाब में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विपक्ष ने राज्य में मादक पदार्थों की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना की। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता सचिन पायलट सहित कई नेताओं ने झोटा के परिवार से मुलाकात की।
पंजाब सरकार ने झोटा की मौत की जांच सीबीआई को सौंप दी और इस मामले में एक थाना प्रभारी, एक पुलिस उपाधीक्षक और एक औषधि निरीक्षक को निलंबित भी किया। जेएसी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की मांग की थी।
अंततः, झोटा के अंतिम संस्कार के दौरान उनके पिता भीम सिंह ने पंजाब के युवाओं से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने इस बुराई के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दी।
Source: NDTV India
