भारत में दीपावली का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस त्योहार को रोशनी, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। दिवाली की रात को विशेष रूप से मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो लोग श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ समय
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे शुभ समय माना जाता है। इस वर्ष प्रदोष काल शाम 5 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस अवधि के दौरान, शाम 5 बजकर 54 मिनट से लेकर रात 7 बजकर 50 मिनट तक वृषभ काल भी रहेगा, जिसे पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस अवधि में लक्ष्मी पूजन करने से विशेष लाभ होता है। भक्तों का विश्वास है कि इस समय की गई पूजा से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनके घर में सुख-शांति का वास होता है।
दिवाली का ऐतिहासिक महत्व
दिवाली का त्योहार भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। जब भगवान राम वनवास से लौटे थे, तब अयोध्या के निवासियों ने उनका स्वागत दीप जलाकर किया था। तभी से यह पर्व प्रकाश और उत्सव का प्रतीक बन गया है।
दिवाली की रात को घर-आंगन को दीपों से सजाया जाता है ताकि मां लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके। यह पर्व न केवल आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देता है।
इस दिवाली पर लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजन की तैयारी कर रहे हैं और प्रदोष काल में पूजा करने की योजना बना रहे हैं।
Source: BBC World News
