राजस्थानी लोक संगीत के मशहूर गायक मामे खान ने हाल ही में बॉलीवुड गानों के बदलते स्वरूप पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड संगीत का पैटर्न अब पहले जैसा नहीं रहा। जहां पहले गानों में कलाकारों को अधिक स्वतंत्रता मिलती थी, वहीं आजकल गानों का स्वरूप बहुत अधिक व्यावसायिक हो गया है।
बॉलीवुड में मामे खान का योगदान
मामे खान, जो कि एक प्रतिष्ठित राजस्थानी लोक गायक हैं, ने बॉलीवुड में भी अपने गानों से पहचान बनाई है। उन्होंने ‘लक बाय चांस’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, और ‘सोन चिरैया’ जैसी फिल्मों में गाने गाए हैं। उनके गाए गाने ‘केसरिया बालम’ और ‘चौधरी’ जैसे लोकगीतों ने भी काफी लोकप्रियता हासिल की है।
कांस फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर चलने वाले भारत के पहले लोक गायक मामे खान ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में की थी। उनके शुरुआती गानों में ‘बावरे’, जिसमें शंकर महादेवन भी शामिल थे, ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई।
राजस्थानी संगीत का वैश्विक प्रभाव
मामे खान ने अपने संगीत के माध्यम से राजस्थानी लोकगीतों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। कोक स्टूडियो एमटीवी के दूसरे सीजन में उन्होंने अमित त्रिवेदी के साथ मिलकर ‘चौधरी’ गीत प्रस्तुत किया था, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
खान ने बताया कि वे अपने इवेंट्स में अक्सर हिंदी गाने गाते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता हमेशा से राजस्थानी लोकगीतों की रही है। वे अपने गानों को यूट्यूब पर भी रिलीज करते हैं, जहां वे थोड़ी बहुत एक्टिंग भी करते हैं।
बॉलीवुड के बदलते स्वरूप पर मामे खान की राय
बॉलीवुड के वर्तमान पैटर्न को लेकर मामे खान ने कहा कि पहले गानों में कलाकारों को अधिक स्वतंत्रता मिलती थी और कमर्शियल तत्व कम होते थे। लेकिन अब गाने दो-तीन मिनट के हो चुके हैं और उनमें कमर्शियलाइजेशन का असर स्पष्ट देखा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लता मंगेशकर और रफी साहब के गाने आज भी लोग सुनते हैं और आगे भी सुनते रहेंगे, क्योंकि वे अपने समय के श्रेष्ठ कलाकार थे।
Source: NDTV India
