जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में पिछले कुछ समय से चल रहे असंतोष के बादल छंटते नजर आ रहे हैं। पार्टी के नाराज विधायकों और शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई है।
फारूक और उमर अब्दुल्ला ने सुनी विधायकों की बातें
इस बैठक में वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नाराज विधायकों की समस्याओं को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। बैठक के बाद सभी नेताओं ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया और किसी भी प्रकार के विभाजन की अटकलों को खारिज कर दिया।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में किसी तरह की टूट की बातें बेबुनियाद हैं। उन्होंने पार्टी की एकता को बनाए रखने और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिलाने की लड़ाई जारी रखने का वादा किया।
विधायकों की मुख्य मांगें
पार्टी के 41 विधायकों में से कम से कम 18 विधायक सरकार और संगठन में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। इन विधायकों का कहना है कि जनता की अपेक्षाओं और सरकार की कार्यशैली के बीच अंतर बढ़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग की है, जिन पर पार्टी नेतृत्व और सरकार के बीच बढ़ती दूरी का आरोप है। इसके अलावा, विधायकों ने उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी से लोक निर्माण विभाग का प्रभार वापस लेने की मांग की है और उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग की है।
पार्टी छोड़ने से इंकार
बैठक के बाद असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जताई। अब्दुल माजिद लारमी ने कहा कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने के बजाय मरना पसंद करेंगे। उन्होंने पार्टी की एकजुटता और संगठन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
विधायकों का कहना है कि वे बागी नहीं हैं, बल्कि पार्टी और सरकार दोनों में सुधार चाहते हैं ताकि संगठन मजबूत हो और जनता का विश्वास बना रहे।
फिलहाल, शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद विवाद शांत हो गया है, लेकिन सुधार और जवाबदेही की मांगें नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
Source: NDTV India
