दिवाली पर एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से को भड़का दिया है। इस वीडियो में एक व्यक्ति अपनी फॉर्च्यूनर कार से एक गरीब महिला के दीये तोड़ता है और फिर कैमरे के सामने मदद का नाटक करता है।
वीडियो का विवाद और प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि व्यक्ति अपनी बड़ी सी फॉर्च्यूनर कार को तेज रफ्तार में चलाते हुए एक गरीब महिला की दीयों की दुकान के पास से गुजरता है। गाड़ी की हवा और टक्कर से महिला के सभी दीये टूट जाते हैं। इसके बाद वही व्यक्ति कैमरे के सामने आता है और महिला को नुकसान के पैसे और राशन देकर मदद का नाटक करता है।
लोगों ने इस वीडियो को ‘सस्ती एक्टिंग’ और ‘टोपीबाजी’ का उदाहरण बताया है। सचिन गुप्ता नामक व्यक्ति द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी है। विशाल अवस्थी ने लिखा कि देश में अब अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि रील्स का खेल चल रहा है। जे. पी. यादव ने कहा कि लोग हर वक्त रील के जुगाड़ में रहते हैं और दर्शक इसे सच मान लेते हैं।
कानूनी पहलू और अनुमानित साजिश
कुछ लोगों ने वीडियो में गाड़ी का नंबर धुंधला (blur) पाए जाने पर इसे जानबूझकर रचा गया ड्रामा करार दिया है। जैक नाम के यूजर ने ध्यान दिलाया कि वीडियो में गाड़ी का नंबर जानबूझकर धुंधला किया गया था ताकि कानूनी परेशानी से बचा जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का मानना है कि यह सब कुछ पहले से तय था और यह सिर्फ व्यूज और लाइक्स पाने के लिए किया गया था।
सोशल मीडिया की नई प्रवृत्ति
यह घटना सोशल मीडिया पर ‘मददगार’ दिखने की नई प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है। कुछ लोग इसे ‘रीलबाजी का चक्कर’ और ‘जनता को मूर्ख बनाने का धंधा’ कह रहे हैं। SACHKAHOON ने तंज कसते हुए कहा कि आजकल सब कुछ कैमरे के भरोसे ही चल रहा है।
यह वीडियो एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती और हमें इन चीजों को समझदारी से देखना चाहिए।
Source: NDTV India
