उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद गहरा गया है। बरेली जिले में एक मुस्लिम बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के खिलाफ हिंदू मतदाताओं के नाम काटने का आरोप लगा है। इस मामले में बीएलओ मोहम्मद नफीस मोहम्मद खां को निलंबित कर दिया गया है।
बरेली में बीएलओ पर लगे गंभीर आरोप
बरेली के शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर में ग्राम प्रधान राहुल गंगवार ने बीएलओ नफीस मोहम्मद खां पर आरोप लगाया कि उन्होंने सांप्रदायिक द्वेष के चलते 26 हिंदू मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवा दिए। आरोपों के अनुसार, नफीस मोहम्मद खां ने पूर्व प्रधान से पैसे लेकर यह कार्य किया था।
इस मामले में कई स्थानीय निवासियों ने भी शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस शिकायत के बाद प्रशासन ने एक जांच कमेटी का गठन किया, जिसने बीएलओ को प्रथम दृष्टया दोषी पाया।
बीजेपी और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप
बीजेपी के प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने इस घटना को ‘वोट जिहाद’ का हिस्सा करार दिया और आरोप लगाया कि मुस्लिम बीएलओ हिंदू मतदाताओं के नाम काट रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर व्यापक जांच की मांग की।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग की विफलता है। सपा ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने की आवश्यकता है और इसमें धार्मिक कोण जोड़ना अनुचित है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम कटने की संभावना है। इस बयान के बाद पूरे राज्य में इस विषय पर बहस छिड़ गई है।
चुनाव आयोग से मांग की जा रही है कि वह इस मामले की गहन जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। इसके साथ ही, आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
Source: NDTV India
