अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी सफलता मिली है, जिसमें मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद के सीनेटर बनने की खबर प्रमुख है। यह पहली बार है जब अमेरिका को एक मुस्लिम सीनेटर मिला है।
ट्रंप की नीतियों की हार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को इस चुनाव में भारी नुकसान हुआ है। दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट – में डेमोक्रेट्स ने बहुमत हासिल किया है। ट्रंप की नीतियों को जनता ने खारिज कर दिया, खासकर मुस्लिम अप्रवासियों के खिलाफ उनके अभियान को।
ट्रंप ने अब्दुल अल-सैयद को निशाने पर रखा था, लेकिन इस रणनीति का कोई असर नहीं हुआ। अब्दुल ने 51.83% वोट हासिल किए, जो उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स से काफी अधिक थे।
अब्दुल अल-सैयद का परिचय
अब्दुल अल-सैयद पेशे से डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म मिशिगन के डेट्रॉयट में हुआ और उनके माता-पिता मिस्र से आए अप्रवासी थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से स्नातक किया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
अब्दुल ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री पूरी की। वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहे हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व किया और गरीबों के चिकित्सा बिल माफ किए।
चुनावी वादे और समर्थन
अब्दुल अल-सैयद ने राजनीति से कॉरपोरेट फंडिंग खत्म करने का वादा किया है। वे दवाइयों और घरों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कड़े कानूनों की वकालत करते हैं। उन्होंने मेडिकेयर फॉर ऑल पर एक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें सभी को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा देने का प्रस्ताव है।
चुनाव में अब्दुल को डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन के साथ-साथ जनता से भी भारी समर्थन मिला। उनकी पार्टी के समर्थकों ने 24 घंटे के भीतर 20 करोड़ का चंदा इकट्ठा किया।
अब्दुल की जीत से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में बदलाव की लहर चल रही है और जनता अब नई नीतियों की ओर देख रही है।
Source: NDTV India
