पारिजात का पौधा, जिसे हरसिंगार भी कहा जाता है, अपने सुगंधित और सुंदर फूलों के कारण बागवानी प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है। हालांकि, कई बार यह पौधा हरा-भरा होते हुए भी फूल नहीं देता या कलियां खिलने से पहले ही गिर जाती हैं। इस समस्या का समाधान देने के लिए प्रसिद्ध गार्डनिंग विशेषज्ञ चेतना भल्ला ने कुछ उपयोगी सुझाव साझा किए हैं।
धूप और प्रकाश का महत्व
चेतना भल्ला के अनुसार, पारिजात के पौधे को पर्याप्त धूप की आवश्यकता होती है। विशेषकर सितंबर के बाद, इसे प्रतिदिन लगभग 5-6 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए। साथ ही, रात में पौधे को पूर्ण अंधकार की आवश्यकता होती है। यदि पौधे के पास रात में कोई कृत्रिम प्रकाश स्रोत है, तो उसे हटाना चाहिए, क्योंकि यह फूल आने में बाधा डाल सकता है।
पानी देने की सही विधि
पारिजात के पौधे को पानी देने का सही तरीका भी बेहद महत्वपूर्ण है। बहुत अधिक पानी देने से जड़ों को नुकसान हो सकता है। खासकर अक्टूबर से शुरू होने वाली ठंड में, जब मिट्टी का पानी धीरे-धीरे सूखता है, तो केवल तब ही पानी दें जब मिट्टी की ऊपरी परत सूख जाए। सुबह 7 से 10 बजे के बीच पानी देना सबसे अच्छा समय है।
उपजाऊ मिट्टी का चयन
पौधे की अच्छी वृद्धि और फूलों की अधिकता के लिए मिट्टी का सही चुनाव आवश्यक है। पारिजात के लिए हल्की अम्लीय मिट्टी, जिसका पीएच 6.2 से 6.8 के बीच हो, उपयुक्त होती है। मिट्टी में वर्मी कंपोस्ट या घर की बनी खाद मिलाने से इसकी उर्वरकता बढ़ाई जा सकती है।
अन्य देखभाल और पोषण
अगर पारिजात के पौधे में फूल नहीं आ रहे हैं, तो आप फिटकरी के पानी का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए 2 ग्राम फिटकरी को 1 लीटर पानी में मिलाकर पौधे की मिट्टी में डालें। ध्यान रखें कि यह पानी देने से पहले मिट्टी में हल्की नमी हो। इसके अतिरिक्त, बोन मील और वर्मी कंपोस्ट मिलाकर पौधे को पोषण दे सकते हैं।
प्रूनिंग और रिपॉटिंग से बचें
चेतना भल्ला सलाह देती हैं कि अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में पौधे की हार्ड प्रूनिंग या रिपॉटिंग से बचें, क्योंकि इस समय पौधे को पोषण की आवश्यकता होती है। दिसंबर और जनवरी में पौधे की वृद्धि धीमी हो सकती है, इसलिए इस दौरान खाद और पानी की मात्रा कम रखें।
Source: NDTV India
