सुप्रीम कोर्ट ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल के बेटों, चेतन और नितिन सभरवाल, के खिलाफ आयकर विभाग की पुनः मूल्यांकन प्रक्रिया को बरकरार रखा है। अदालत ने दोनों भाइयों द्वारा दायर चार अपीलों को खारिज कर दिया है, जिसमें 2007 के शेयर सौदे और दिल्ली के सिकंदरा रोड पर प्रॉपर्टी खरीद से जुड़े आयकर री-असेसमेंट नोटिस को चुनौती दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला दिल्ली के सिकंदरा रोड पर 2010 में खरीदी गई एक प्रमुख प्रॉपर्टी से संबंधित है। आयकर विभाग को संदेह था कि इस प्रॉपर्टी को खरीदने में उपयोग की गई राशि दो कंपनियों के शेयरों की बिक्री से प्राप्त हुई थी। विभाग ने शेयरों की बिक्री के लिए तय की गई कीमत और उनकी वास्तविक कीमत के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठाए थे। आगे की जांच में यह सामने आया कि शेयर बेचकर मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया था।
अक्टूबर 2007 में चेतन और नितिन सभरवाल ने पवन इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के शेयर बेचने का समझौता किया था। इन शेयरों की बिक्री के लिए क्रमशः 195 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये की कीमत तय की गई थी।
अदालत का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को दिए अपने फैसले में आयकर विभाग द्वारा 31 मार्च 2015 को जारी नोटिस को पर्याप्त आधार पर सही ठहराया। न्यायालय ने कहा कि आयकर अधिकारी को यह विश्वास करने का उचित कारण था कि टैक्स के दायरे में आने वाली आय का आकलन सही ढंग से नहीं हुआ है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘रीजन टू बिलीव’ का अर्थ यह नहीं है कि टैक्स चोरी का अंतिम रूप से प्रमाण होना चाहिए, बल्कि अधिकारी के पास जांच की जरूरत का उचित आधार होना पर्याप्त है।
आगे की कार्रवाई
आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि शेयरों की बिक्री से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली के सिकंदरा रोड स्थित प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल हुआ था। इस निवेश के आधार पर सभरवाल भाइयों ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54F के तहत कैपिटल गेन टैक्स से छूट का दावा किया था।
अब आयकर विभाग इस पूरे लेनदेन की जांच और टैक्स छूट के दावे को पुनः परखने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आयकर विभाग की जांच को और गति मिल सकती है।
Source: BBC World News
