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PMOS से जूझ रही महिलाओं के लिए योग साबित हो सकता है फायदेमंद: AIIMS अध्ययन

महिलाओं के लिए जो PMOS (पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) से प्रभावित हैं, उनके लिए आंतों की सेहत एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। ऐसे में हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पता चला है कि नियमित योगाभ्यास करने से PMOS के कारण होने वाली आंतों की समस्याओं में सुधार हो सकता है।

AIIMS के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में यह दिखाया है कि योग का अभ्यास केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है। PMOS से पीड़ित महिलाओं को अक्सर पेट में दर्द, सूजन और अन्य गट हेल्थ संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में योगाभ्यास से न केवल इन समस्याओं में कमी आ सकती है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

योग के लाभ और PMOS से जुड़ी समस्याएँ

PMOS एक हार्मोनल असंतुलन है, जो महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। इसके साथ ही, यह आंतों की सेहत को भी प्रभावित करता है। AIIMS के शोधकर्ताओं ने बताया कि योग का नियमित अभ्यास करने से शरीर में हार्मोन का स्तर संतुलित होता है, जिससे आंतों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

योग की विभिन्न प्रथाएँ, जैसे प्राणायाम और आसन, तनाव को कम करने और पाचन तंत्र को सुधारने में मदद कर सकती हैं। अध्ययन में शामिल महिलाओं ने योग के अभ्यास के बाद अपने गट हेल्थ में सुधार की पुष्टि की है। उनके लिए यह एक सकारात्मक बदलाव साबित हुआ है।

अध्ययन के निष्कर्ष और आगे की राह

AIIMS के इस अध्ययन के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि योग को एक समग्र उपचार के रूप में देखा जा सकता है। यह न केवल PMOS के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है, बल्कि महिलाओं की मानसिक स्थिति को भी बेहतर बना सकता है।

इस अध्ययन के परिणामों के आधार पर, स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि महिलाएं नियमित रूप से योग का अभ्यास करें, ताकि वे PMOS और गट हेल्थ से जुड़ी समस्याओं से राहत पा सकें।

आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अधिक महिलाएं इस अध्ययन के निष्कर्षों को अपनाती हैं और योग को अपने दैनिक जीवन में शामिल करती हैं। इससे न केवल उनकी सेहत में सुधार होगा, बल्कि यह एक नई जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करेगा।

Source: NDTV India

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