इंडोनेशिया में जंगल की आग के कारण धुएं से प्रभावित होकर 1,75,000 से अधिक लोगों को श्वसन संबंधी बीमारियाँ हो चुकी हैं। इनमें 40,000 से अधिक मामले छोटे बच्चों के हैं, जो खांसी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं।
जंगल की आग और धुएं का प्रभाव
इंडोनेशिया के हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी मलेशिया और सिंगापुर भी जहरीले धुएं से प्रभावित हैं, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक “अस्वस्थ” स्तर पर पहुँच गया है। सरकार ने बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों पर आग बुझाने के लिए 54,000 से अधिक अधिकारियों और दर्जनों जेट विमानों को तैनात किया है।
हालांकि, विशाल क्षेत्र और पीटलैंड की जटिल परिस्थितियाँ आग बुझाने में कठिनाई पैदा कर रही हैं।
जंगल की आग के पीछे का कारण
इंडोनेशिया में हर साल जुलाई से अक्टूबर के बीच सूखे मौसम के दौरान जंगल की आग लगती है। इस वर्ष, “गॉडजिला” एल नीनो के कारण अत्यधिक शुष्क परिस्थितियाँ पैदा हुई हैं, जिससे आग और धुआं बढ़ गया है।
नुसंतारा एटलस के अनुसार, देश में 7,34,000 से अधिक हॉटस्पॉट्स दर्ज किए गए हैं, जो 2019 की तुलना में 30% अधिक हैं। इस वर्ष जनवरी से अब तक 8,95,657 हेक्टेयर भूमि जल चुकी है।
स्वास्थ्य और वन्यजीवन पर प्रभाव
इस आग के कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा है और अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर तक श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों की संख्या 1,13,336 तक पहुँच गई थी।
धुएं का प्रभाव वन्यजीवन पर भी पड़ा है, जिसमें गंभीर रूप से विलुप्तप्राय प्रजातियाँ जैसे ओरंगुटान शामिल हैं। एक ओरंगुटान को पश्चिमी कालिमंतान में एक पाम ऑयल प्लांटेशन में पाया गया था, जो बाद में बचाया गया था लेकिन बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
सरकारी कार्रवाई और संघर्ष
पश्चिमी कालिमंतान में स्थानीय समूहों ने सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसमें उन्हें आग से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह आपदा हर साल होती है और सरकार को इसके बारे में पता था।
इंडोनेशिया ने हाल के हफ्तों में कई बार क्लाउड-सीडिंग ऑपरेशन किए हैं, जिसमें जापान के आत्मरक्षा बलों की मदद भी शामिल है।
