उर्दू साहित्यिक पत्रिकाओं का डिजिटल युग में परिवर्तन
उर्दू साहित्यिक पत्रिकाएँ डिजिटल युग में प्रवेश कर रही हैं, जिससे तकनीकी रूप से कम जानकार पाठक नई शोध और साहित्यिक कार्यों से वंचित रह सकते हैं। कुछ पत्रिकाएँ जैसे ‘मुकालमा’ और ‘ज़ीस्त’ बिना संस्थागत समर्थन के भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
