महिलाओं के लिए फिटनेस का सबसे बड़ा मिथक: केवल कार्डियो करना ही काफी है
फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ, कई महिलाएं अपने वर्कआउट रूटीन में कार्डियो एक्सरसाइज को प्राथमिकता देती हैं। लेकिन क्या केवल कार्डियो करना ही पर्याप्त है? न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि यह एक बड़ा मिथक है। वे बताते हैं कि ताकत प्रशिक्षण (स्ट्रेंथ ट्रेनिंग) भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि कार्डियो।
कार्डियो बनाम ताकत प्रशिक्षण
महिलाएं अक्सर सोचती हैं कि कार्डियो एक्सरसाइज जैसे दौड़ना, साइकिल चलाना या एरोबिक्स करने से वे वजन कम कर सकती हैं और अपनी फिटनेस को बनाए रख सकती हैं। हालांकि, डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि केवल कार्डियो पर निर्भर रहना एक सीमित दृष्टिकोण है। ताकत प्रशिक्षण, जिसमें वजन उठाना और विभिन्न प्रतिरोध व्यायाम शामिल हैं, मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और शरीर की समग्र शक्ति को बढ़ाता है।
ताकत प्रशिक्षण से मेटाबोलिज्म में सुधार होता है, जिससे शरीर कैलोरी को अधिक प्रभावी ढंग से जलाता है। इसके अलावा, यह हड्डियों की मजबूती को बढ़ाने में भी सहायक होता है, जो उम्र बढ़ने पर महत्वपूर्ण है।
ताकत प्रशिक्षण के लाभ
डॉ. कुमार के अनुसार, ताकत प्रशिक्षण के कई लाभ हैं। सबसे पहले, यह मांसपेशियों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। जब महिलाएं ताकत प्रशिक्षण करती हैं, तो उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे वे दैनिक गतिविधियों को अधिक आसानी से कर सकती हैं। इसके अलावा, यह शरीर की चर्बी को कम करने में भी मदद करता है, जिससे शरीर की संरचना में सुधार होता है।
दूसरा, ताकत प्रशिक्षण से मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। व्यायाम के दौरान एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जो तनाव को कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ताकत प्रशिक्षण आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है, क्योंकि महिलाएं अपने शरीर की ताकत और क्षमता को महसूस करती हैं।
सही वर्कआउट रूटीन का निर्माण
महिलाओं को एक संतुलित वर्कआउट रूटीन बनाने की सलाह दी जाती है, जिसमें कार्डियो और ताकत प्रशिक्षण दोनों को शामिल किया जाए। डॉ. कुमार का सुझाव है कि सप्ताह में कम से कम दो दिन ताकत प्रशिक्षण किया जाना चाहिए। इसमें विभिन्न प्रकार के व्यायाम शामिल किए जा सकते हैं, जैसे कि स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स, और पुश-अप्स।
इसके साथ ही, कार्डियो एक्सरसाइज को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम-तीव्रता वाला कार्डियो करना फायदेमंद होता है। इस तरह, महिलाएं अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के लक्ष्यों को बेहतर तरीके से प्राप्त कर सकती हैं।
निष्कर्ष
महिलाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल कार्डियो पर निर्भर रहना उनके स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नहीं है। ताकत प्रशिक्षण को अपने वर्कआउट रूटीन में शामिल करके, वे न केवल अपने शरीर को मजबूत बना सकती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकती हैं। डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, एक संतुलित और विविध वर्कआउट रूटीन ही महिलाओं को दीर्घकालिक स्वास्थ्य और फिटनेस के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा।
