दिवाली के नजदीक आते ही पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ी आई है, जिससे प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित छह राज्यों में पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए हैं।
पराली जलाने की घटनाओं का ताजा आँकड़ा
CREAMS लैब की रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर से 6 नवंबर 2026 के बीच इन राज्यों में कुल 6,266 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से सबसे अधिक घटनाएं पंजाब में हुई हैं, जहां कुल 3,144 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं।
मध्य प्रदेश में 139, राजस्थान में 58, उत्तर प्रदेश में 23, हरियाणा में 9 और उत्तराखंड में 3 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
प्रदूषण और सरकारी प्रयास
पराली जलाने की घटनाओं की संख्या में वृद्धि से दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। इससे पहले, 3 नवंबर को पंजाब में एक दिन में 584 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो इस सीजन का सबसे अधिक आंकड़ा था।
हालांकि, CREAMS लैब के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में थोड़ी कमी आई है। 2025 में 6 नवंबर तक पंजाब में 3,284 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि इस वर्ष 3,144 घटनाएं ही हुई हैं।
पर्यावरणीय चिंताएँ और समाधान
पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं वायु प्रदूषण को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं, विशेषकर दिल्ली-NCR क्षेत्र में। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
सरकार द्वारा पराली जलाने को रोकने के लिए विभिन्न योजनाएं और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद, इस समस्या का समाधान अभी दूर है।
Source: NDTV India
