केरल के चेरनल्लूर में एक दुखद घटना हुई जब 17 वर्षीय नाबालिग ने मर्सिडीज-बेंज कार चलाते हुए जयबालाकृष्णन नामक व्यक्ति को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने आरोपी नाबालिग के पिता को अग्रिम जमानत दे दी है। जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने इस फैसले को ‘सीने में छुरा घोंपने जैसा’ बताया है और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है।
जमानत का फैसला और परिवार की प्रतिक्रिया
आरोपी के पिता, जो एक सेशन जज हैं, को हाई कोर्ट ने जमानत दी है। इस फैसले पर मृतक की बेटी भद्रा कीर्ति ने गहरा असंतोष जताया है। भद्रा ने कहा कि यह फैसला उनके पिता के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने से ठीक एक दिन पहले आया, जो उनके लिए बहुत बड़ा धक्का है। परिवार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का निर्णय लिया है।
अदालत की सुनवाई और अभियोजन पक्ष की अपील
इस मामले में गुरुवार को दो अलग-अलग अदालतों में सुनवाई हुई। एक ओर केरल हाई कोर्ट में आरोपी के पिता की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, वहीं दूसरी ओर एर्नाकुलम की सेशन कोर्ट में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा नाबालिग को दी गई जमानत के खिलाफ अभियोजन पक्ष की अपील पर बहस हुई।
सेशन कोर्ट ने जांच अधिकारी को उन मामलों का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिनमें नाबालिग चालकों से जुड़े घातक हादसों में गैर-इरादतन हत्या की धाराएं लगाई गई थीं। अदालत यह जानना चाहती थी कि क्या इस मामले में लागू की गई धाराएं अन्य समान मामलों के अनुरूप हैं।
हाई कोर्ट का निर्णय और भविष्य की संभावनाएं
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने पूछा कि जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है, तो उसकी कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत क्यों है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में आरोपी न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है, तो उसकी जमानत रद्द की जा सकती है।
फैसला आने के बाद भी पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है और उन्होंने न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। परिवार का कहना है कि वे अपने पिता के लिए न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
Source: NDTV India
