त्योहारों के मौसम में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि ने आम जनता की रसोई के बजट को प्रभावित किया है। पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में 4 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है, जबकि साल भर में यह बढ़ोतरी 13 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
कीमतों में वृद्धि के कारण
चीनी की कीमतों में उछाल का एक प्रमुख कारण 2025-26 के दौरान अपेक्षित उत्पादन में कमी है। इसके अतिरिक्त, त्योहारों के दौरान मांग में वृद्धि, फसल को हुए नुकसान और वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी भी इस वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में चीनी की जमाखोरी भी कीमतें बढ़ने का एक कारण हो सकती है।
बड़े शहरों में चीनी की कीमतें
देश के प्रमुख शहरों में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कोलकाता में 3 नवंबर को चीनी की खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जो पिछले साल 50 रुपये थी। दिल्ली में वर्तमान में चीनी की कीमत 64 रुपये प्रति किलो है, जबकि पिछले वर्ष यह 46 रुपये थी। मुंबई में भी चीनी की कीमत 61 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो एक साल पहले 45 रुपये थी।
सरकार के कदम
सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें शुगर स्टॉक की सीमा तय करना, आयात को बढ़ावा देना, और बाजार की निगरानी करना शामिल है। इसके अलावा, इस वर्ष गन्ने की पेराई प्रक्रिया को पहले शुरू किया गया है ताकि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सके।
उत्पादन और आपूर्ति
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के अनुसार, 2026-27 के सीजन के पहले महीने में भारत में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी का नया सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है और इस साल गन्ने की पेराई 8 अक्टूबर से शुरू हुई थी।
Source: NDTV India
